Tuesday, March 5, 2024

जिनालय में मनाई आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती

रायपुर. श्री पद्मप्रभ जिनालय लाभांडी में प्रथम तीर्थंकर आदि ब्रम्हा आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती उत्साह से मनाई गई. सबसे पहले मंगलाष्टक का पाठ किया गया. उसके बाद अभिषेक विधि के मंत्रोचार के माध्यम से मूलनायक 1008 भगवान पद्मप्रभ, आदिनाथ, चन्द्रप्रभ का प्रक्षाल कर 1008 भगवान आदिनाथ को पांडुकशीला में विराजमान किया गया. आज के प्रथम कलश करने का सौभाग्य प्रदीप कुमार, ऋषभ कुमार बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ.

श्री पद्मप्रभ भक्त परिवार के सदस्य अरविंद जैन ने बताया कि श्री पद्मप्रभ जिनालय लाभांडी में आज चैत्र कृष्ण नवमी के अवसर पर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदि ब्रम्हा आदिनाथ की जन्म जयंती धूमधाम से मनाई गई. सभी सदस्यों ने चतुर्थ कलश व स्टेमनोरथ कलश के माध्यम से आदिनाथ भगवान का मस्तकाभिषेक कर पुण्य संचय किया. आज की शांतिधारा का सौभाग्य कैलाश जैन रांची वाले और रचित जैन शांतिनगर लाभांडी वाले को प्राप्त हुआ.

श्री पद्मप्रभ भगवान की आरती के बाद आदिनाथ भगवान की आरती हुई. पूजन विधि प्रारंभ कर नवदेवता की पूजा, मूलनायक भगवन पद्मप्रभ भगवान की पूजा के बाद विवेक जैन के कुशल मार्गदर्शन में भगवान आदिनाथ की पूजा शुरु हुई. जन्म कल्याणक के अर्घ्य और आज ही के दिन भगवान आदिनाथ का तप कल्याणक होने से दोनों कल्याणक का सभी उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने अर्घ्य समर्पित किया. उसके बाद भगवान की जन्म नगरी अयोध्या का भाव संजोकर सभी लोगों ने भगवान आदिनाथ के पिताश्री राजा नाभिराय व माताश्री मरु देवी को बधाई देने भक्ति नृत्य के साथ बधाई गीत गाया.

आदिनाथ को पालना में विराजमान कर झुलाया झूला
भक्तों ने बालक आदिनाथ को पालना में विराजमान कर झूला झुलाकर अपने पुण्य व प्रफुल्लित भावों का इजहार किया.प्राणिमात्र के जीवन में पुण्य, सुख समृद्धि बढ़े व दुखों व पापों का नाश हो, इस भावना से कष्टों को हरने वाले भक्तामर स्त्रोत के विधान में 48 स्त्रोतों पर अर्घ्य समर्पित कर जयमाला का पठन कर पूर्णाहुति की गई. अंत में विसर्जन कर आज के धरती के भगवान संत शिरोमणि आचार्यश्री 108 विद्या सागर की आरती की गई.

21 दिनों तक मनाएंगे जन्म जयंती महोत्सव
अरविंद जैन ने बताया कि अजैन भाई लोग जैन धर्म के प्रवर्तक के रूप में भगवान महावीर स्वामी को ही मानते हैं, जबकि वे अंतिम 24 वें तीर्थंकर हैं. प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हैं, इन्होंने ही कल्पवृक्ष की समाप्ति के बाद असी, मसी, कृषि, वाणिज्य आदि के माध्यम से संसार को जीविकोपार्जन के लिए शिक्षा दी. इस वर्ष सकल जैन समाज रायपुर भगवान आदिनाथ की जयंती से भगवान महावीर की जयंती तक 21 दिनों का ये जन्मजयंती महोत्सव मनाएगा, जिसका प्रारंभ आज भगवान आदिनाथ की जयंती से हुआ.

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