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CG : CM बघेल ने लोकवाणी में ‘आदिवासी अंचलों की अपेक्षाएं और विकास’ विषय पर की बातचीत : पढ़िए पूरी खबर

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  • जनसुविधा की दृष्टि से हमने किया राज्य में 29 नई तहसीलों और 4 नए अनुविभागों का गठन: मुख्यमंत्री बघेल

  • छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार

  • मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की यूएनडीपी और नीति आयोग ने की सराहना

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज ‘‘लोकवाणी‘‘ की 20वीं कड़ी में ‘‘आदिवासी अंचलों की अपेक्षाएं और विकास‘‘ विषय पर प्रदेशवासियों से बात-चीत करते हुए सबसे पहले छत्तीसगढ़ी में प्रदेशवासियों को पारंपरिक हरेली तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनुसार हरेली साल का पहला त्यौहार है। इस दिन अपने गांव-घर, गौठान को लीप-पोत कर तैयार किया जाता है। गौमाता की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया भावना को ध्यान में रखते हुए हरेली सहित पांच त्यौहारों में सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। उन्होने विश्व आदिवासी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश में पहली बार विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की परंपराओं, संस्कृतियों और उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदेशवासियों को अगस्त माह में आने वाले त्यौहार हरेली, नागपंचमी, राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस, ओणम, राखी, कमरछठ और कृष्ण जन्माष्टमी की भी बधाई दी।

29 नई तहसीलों और 04 अनुविभागों का गठन

मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के श्री सतीश उपाध्याय, बालोद जिले के युवा श्री विनय कुमार मरकाम और बस्तर अंचल के दरभा के रहने वाले श्री सोमनाथ से हुई बातचीत का उत्तर देते हुए कहा कि हमने ढाई वर्षों में 29 नई तहसीलें और 4 नए अनुविभाग गठित किए हैं, उनमें से अधिकतर आदिवासी अंचल में ही हैं। कोरिया जिले में पटना के साथ चिरमिरी और केल्हारी तहसीलें भी गठित की गई हैं। इसके अलावा कबीरधाम जिले में रेंगाखार-कला, सरगुजा जिले में दरिमा, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में रामचंद्रपुर, सामरी, सूरजपुर जिले में लटोरी, बिहारपुर, जशपुर जिले में सन्ना और सुकमा जिले में गादीरास आदि प्रमुख हैं। इसी तरह चार नवीन अनुविभागों में दंतेवाड़ा का बड़े बचेली और बस्तर का लोहंडीगुड़ा शामिल है। बरसों पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए गौरेला – पेण्ड्रा – मरवाही को जिला ही नहीं बनाया गया बल्कि आदिवासी बहुल आबादी वाले इस क्षेत्र को उनका हक भी दिया गया। हमारा यह मानना है कि नई प्रशासनिक इकाईयों के गठन से लोगों को अपनी भूमि, खेती-किसानी से संबंधित काम, बच्चों की पढ़ाई, नौकरी या रोजगार से संबंधित कामों के लिए आसानी होगी। सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा। इसे ही हमने प्रशासनिक संवेदनशीलता का मूलमंत्र बनाया है। उन्होंने कहा कि जहां तक कोरिया जिले के मेरीन फॉसिल्स पार्क – जैव विविधता पार्क का सवाल है, हम सिर्फ कोरिया ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जिले में अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को सहेजने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं।

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52 वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत चेरपाल की सुश्री यशोदा पुजारी, सुकमा जिले के पोलमपल्ली निवासी श्री अजय बघेल और कबीरधाम जिले के श्री दयाल सिंह बैगा के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन से हमें लगा था कि आदिवासी अंचलों और शेष क्षेत्रों के बीच विकास का अंतर दूर कर लिया जाएगा, लेकिन विगत 15 वर्षों में यह अंतर और भी अधिक बढ़ गया है। इसलिए हमने सबसे पहले विश्वास जीतने की बात की। इसके लिए निरस्त वन अधिकार पट्टों के दावों की समीक्षा, जेल में बंद आदिवासियों के प्रकरणों की समीक्षा कर अपराध मुक्ति, बड़े उद्योग समूह के कब्जे से आदिवासियों की जमीन वापस लौटाने का निर्णय, तेंदूपत्ता संग्रहण दर 2500 रुपए से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा करने का निर्णय लिया गया। इससे आदिवासी अंचलों में सरकार और व्यवस्था के प्रति विश्वास का नया दौर शुरू हुआ है। हमने 7 से बढ़ाकर 52 वनोपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की, पुरानी दरों को भी बदला जिसके कारण वनोपज संग्रह से ही 500 करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त सालाना आमदनी का रास्ता बन गया। अनुसूचित क्षेत्रों में कोदो, कुटकी, रागी जैसी फसलों को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने के इंतजाम किए गए हैं तथा लाख को कृषि का दर्जा दिया गया है। वन अधिकार मान्यता पत्रधारी परिवारों के खेतों में उपजे धान को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की गई है। देवगुड़ी और घोटुल स्थलों का विकास कर आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में 1637 करोड़ रूपए की लागत से सड़कें

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 16 हजार करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हमारे आदिवासी अंचलों को सैकड़ों ऐसी सड़कें मिलेंगी, जिनका इंतजार वे दशकों से कर रहे थे। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने के लिए हम 1 हजार 637 करोड़ रुपए की लागत से सड़कें बना रहे हैं। आदिवासी अंचलों में बिजली की सुविधा देने के लिए अति उच्च दाब के चार वृहद उपकेन्द्र का निर्माण पूरा कर लिया गया है। नारायणपुर, जगदलपुर, बीजापुर और सूरजपुर जिले के उदयपुर में ये उपकेन्द्र प्रारंभ हो जाने से बिजली आपूर्ति सुचारू हो गई है। इसके अलावा विगत ढाई वर्षों में आदिवासी अंचलों में सौर ऊर्जा से संचालित 74 हजार सिंचाई पम्प, 44 हजार से अधिक घरों में रोशनी और लगभग 4 हजार सोलर पेयजल पम्पों की स्थापना की गई है, जो अपने आप में कीर्तिमान है।

छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार

कबीरधाम जिले के श्री किशन लाल द्वारा वनोपजों के प्रसंस्करण को आगे बढ़ाने को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बताया कि बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा में एक बड़े उद्योग की स्थापना के नाम से ली गई आदिवासियों की जमीन वापसी की घोषणा के साथ आदिवासियों को न्याय दिलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। 10 गांवों के 1 हजार 707 किसानों को 4 हजार 200 एकड़ जमीन के दस्तावेज प्रदान किए जा चुके हैं। कोण्डागांव में मक्का प्रोसेसिंग इकाई का शिलान्यास किया गया है। प्रदेश में 146 विकासखण्डों में से 110 विकासखण्डों में फूडपार्क स्थापित करने हेतु भूमि का चिन्हांकन तथा अनेक स्थानों पर भूमि हस्तांतरण भी किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ में 139 वनधन विकास केन्द्र स्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 50 केन्द्रों में वनोपजों का प्रसंस्करण भी हो रहा है। इस काम में लगभग 18 हजार लोगों को रोजगार मिला है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा ‘छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से 121 उत्पादों की मार्केटिंग की जा रही है। भारत सरकार की संस्था ट्रायफेड द्वारा 6 अगस्त को छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी तथा इससे संबंधित अन्य व्यवस्थाओं के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।  यह हमारे आदिवासी अंचलों के साथ पूरे प्रदेश के लिए भी गौरव का विषय है। दुर्ग जिले में 78 करोड़ रुपए से अधिक लागत पर एक वृहद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। राज्य में वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए वनांचल उद्योग पैकेज लागू किया गया है। इसके अलावा दंतेवाड़ा में रेडिमेड कपड़ों का ‘ब्रांड डेनेक्स’ एक सफल प्रयोग साबित हुआ है। नवचेतना बेकरी भी काफी सफल हो रही है। ऐसे कामों से सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है।

‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ से बढ़ेंगे ग्रामीणों के आय के साधन

‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को वे भविष्य में स्थानीय लोगों, आदिवासी और वन आश्रित परिवारों की आय के बहुत बड़े साधन के रूप में देखते हैं। खुद लगाए वृक्षों से इमारती लकड़ी की कटाई और फलों को बेचकर लोगों की आय बड़े पैमाने पर बढ़ेगी।  निजी लोगों को ही नहीं, बल्कि पंचायतों और वन प्रबंधन समितियों को भी पेड़ लगाने और काटने के अधिकार दिए गए हैं।

हाट-बाजारों तक पहुंची स्वास्थ्य सुविधा, एनीमिया और कुपोषण में आई कमी

लोकवाणी के माध्यम से आदिवासी क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकताएं अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, रोजगार और स्कूल में शिक्षकों की कमी के प्रश्न पर जवाब देते हुए श्री बघेल ने कहा कि निश्चित तौर पर आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सबसे बड़ी जरूरत है। इस दिशा में प्राथमिकता से काम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरतोें को  डीएमएफ मद से पूरी करने के लिए आवश्यक नियम बनाए गए हैं। सीएसआर और अन्य मदों की राशि भी इन्हीं प्राथमिकताओं के लिए खर्च करने की रणनीति अपनाई है। इसके कारण बीजापुर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर में अब उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं। सुकमा जिले में भी बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के सुदूर अंचल में ग्रामीणों को सहजता से स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने हमने मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना शुरू की है। इससे अब आदिवासी भाई-बहनों का उपचार हाट-बाजारों में होने लगा है। इसका लाभ 11 लाख से अधिक लोगों को मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पांच वर्ष से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार थे और 15 से 49 वर्ष तक की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया अर्थात खून की कमी से ग्रस्त थीं। आदिवासी जिलों में हालत और भी खराब थी। इसे देखते हुए हमने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया, जिसमें डीएमएफ और जनभागीदारी के योगदान को बढ़ावा दिया। योजना के माध्यम से बच्चों को दूध, अण्डा, स्थानीय प्रचलन के अनुसार पौष्टिक आहार दिया, जिसके कारण कुपोषण और एनीमिया की दर में तेजी से कमी आ रही है।

मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की यूएनडीपी और नीति आयोग ने की सराहना

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान शुरू होने से एक साल में बस्तर संभाग में मलेरिया के प्रकरण 45 प्रतिशत और सरगुजा संभाग में 60 प्रतिशत कम हो जाना सुखद है। यूएनडीपी और नीति आयोग ने मलेरियामुक्त बस्तर अभियान की तारीफ करते हुए बीजापुर जिले में मलेरिया में 71 प्रतिशत तथा दंतेवाड़ा में 54 प्रतिशत तक कमी करने की सफलता को बेस्ट प्रेक्टिस के रूप में सराहा है और अन्य आकांक्षी जिलों को भी इस अभियान को अपनाने की सलाह दी है।

प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति

श्री बघेल ने बताया कि शिक्षा के लिए हमने संकटग्रस्त क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस किया। जिसके कारण सुकमा जिले के जगरगुंडा में 13 वर्षों से बंद स्कूल बीते साल खुल चुका है। कुन्ना में स्कूल भवन का पुनर्निर्माण तथा दंतेवाड़ा जिले के मासापारा-भांसी में भी 6 सालों से बंद स्कूल अब खुल गया है। कोरोना काल में पढ़ाई तुंहर पारा अभियान के तहत लाखों बच्चों को उनके गांव-घर-मोहल्लों में खुले स्थानों पर भी पढ़ाया गया। प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों को मातृभाषा में समझाना अधिक आसान होता है इसलिए हमने 20 स्थानीय बोली-भाषाओं में पुस्तकें छपवाईं, जिसका लाभ आदिवासी अंचलों में मिला। बीस साल बाद प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति आदेश दे दिए गए हैं। इससे आदिवासी अंचलों में भी शिक्षकों की कमी स्थायी रूप से दूर हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कोरोना की ‘तीसरी लहर’ को लेकर सभी से बहुत सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्व-त्यौहार मनाते समय फिजिकल डेस्टिेंसिंग का पालन करें, मास्क का उपयोग करें, हाथ को साबुन-पानी से धोते रहें तथा टीका जरूर लगवाएं। खुद को बचाए रखना ही सबसे जरूरी उपाय है।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राम-वन-गमन पथ पर बात करते हुए कहा कि यह बहुत गर्व का विषय है कि भगवान राम का अवतार जिस काम के लिए हुआ था, उन प्रसंगों की रचना छत्तीसगढ़ में हुई। वास्तव में भगवान राम छत्तीसगढ़ में कौशल्या के राम और ‘वनवासी राम’ के रूप में प्रकट होते हैं।  यह अद्भुत संयोग है कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ में प्रवेश, संचरण और प्रस्थान सघन आदिवासी अंचल में ही हुआ। कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका में प्रवेश और सुकमा जिले के अंतिम स्थान कोंटा तक उनकी पदयात्रा। एक बार फिर राम के रास्ते पर चलते हुए अगर हम 2 हजार 260 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करते हैं तो इससे पूरे रास्ते में विकास के दीये जल उठेंगे। आस्था के साथ जुड़ी सड़कें, सुविधाओं के साथ आजीविका के नए-नए साधन भी आएंगे। यह समरसता और सौहार्द्र के साथ वनवासी राम के प्रति आस्था का परिपथ बनेगा, जो नदियों, नालों, झरनों, जलप्रपातों, खूबसूरत जंगलों से गुजरते हुए सैकड़ों पर्यटन स्थलों का उद्धार करेगा।

 

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राज्य एवं शहर

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल ने श्रमिकों और सुरक्षा कर्मियों को कंबल वितरित किए 

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रायपुर : राज्यपाल अनुसुईया उइके ने बढ़ते हुए ठंड को देखते हुए श्रमिकों, सुरक्षा कर्मियों तथा राजभवन के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को कंबल वितरित किए। इस अवसर पर राज्यपाल ने सामाजिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे जरूरतमंदों की मदद के लिए सामने आएं और यथासंभव मदद करें।

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CORONA VIRUS

छत्तीसगढ़ में आज कोरोना से 10 मरीजों की मौत, 4574 नए मामलों की पुष्टि, 5396 हुए ठीक ; रायपुर से 1208 और दुर्ग से 751 केस

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रायपुर : छत्तीसगढ़ मे कोरोना की तीसरी लहर में रोज नए मामलों के बढ़त देखी जा रहीं हैं। इसी बीच प्रदेश में आज 4574 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार बीते 24 घंटे में 5396 मरीज स्वस्थ हुए हैं।

प्रदेश में पॉजिटिविटी दर 12.02% प्रतिशत है। आज प्रदेश भर में हुए 38 हजार 064 सैंपलों की जांच में से 4574 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

प्रदेश में आज कोरोना से 10 मरीज की मौत हुई है। प्रदेश में अब तक 13,664 कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो चुकी है।

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आज 4574 नए संक्रमित मरीजों की पुष्टि होने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 10 लाख 64 हजार 290 संक्रमित हो गई है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 18 हजार 666 मरीज स्वस्थ हुए हैं। नए मरीज मिलने और डिस्चार्ज होने के बाद अब सक्रिय मरीजों की संख्या 31,960 हो गई है।

प्रदेश के इन जिलों में 5 से 50 के मध्य कोरोना संक्रमित पाए गए

प्रदेश 17 जनवरी को जिला बलरामपुर में 50, सुकमा में 45, बस्तर से 35, बेमेतरा से 31, दंतेवाड़ा से 27, महासमुन्द से 26, मुंगेली से 21, बीजापुर से 11 नारायणपुर से 8 एवं गरियाबंद से 5 कोरोना संक्रमित पाए गए।

प्रदेश के 10 जिलों में पॉजिटीविटी दर 4 प्रतिशत कम रही

प्रदेश 17 जनवरी को जिला बलरामपुर, दंतेवाडा, बस्तर, मुंगेली, कबीरधाम एवं बीजापुर में पॉजिटीविटी दर 4 प्रतिशत कम रही ।

देखिए जिलेवार आंकड़ा :

 

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Special News

लघु वनोपजों की खरीदी में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल

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  • तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री में 1090% का इजाफा
  • लघु वनोपजों से संवर रहा है छत्तीसगढ़ के वनवासियों का जीवन
  • मुख्यमंत्री के प्रयासों से हो रही है अधिकतम लघु वनोपजों की खरीदी
  • छत्तीसगढ़ हर्बल के माध्यम से छत्तीसगढ़ की बन रही है विश्वव्यापी पहचान

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य ने एक नया कीर्तिमान कायम करते हुए बीते तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री में 1090 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है। वर्ष 2017-18 में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री 1 करोड़ 26 लाख रूपए थी जो वर्ष 2018-19 में 8.7 फीसदी बढ़कर 1 करोड़ 37 लाख रूपए तक पहुंची थी। वर्ष 2019-20 में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पादों की बिक्री 1 करोड़ 25 लाख रूपए की रही। वर्ष 2020-21 में विगत आंकड़ों से 70 फीसदी की वृद्धि के साथ छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री 2 करोड़ 15 लाख रूपए रही। वर्ष 2021-22 में छत्तीसगढ़ हर्बल के उत्पादों की बिक्री के लिए 7 करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा गया तथा वित्तीय वर्ष के शुरूआती 9 माह में ही लक्ष्य के विरूद्ध 4 करोड़ 34 लाख रूपए के उत्पादों की बिक्री की जा चुकी है। यह 2017-18 के विरूद्ध 455 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह से छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2022-23 के लिए छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पादों की बिक्री के लिए 15 करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा है और यह लक्ष्य साल 2017-18 की तुलना में 1090 फीसदी अधिक है ।

छत्तीसगढ़ राज्य सन 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना था, तब छत्तीसगढ़ को कोई जानता भी नहीं था परन्तु धीरे धीरे छत्तीसगढ़ अब हर क्षेत्र में आगे आते जा रहा है। उन्ही में से एक क्षेत्र है लघु वनोपज संग्रहण का क्षेत्र जिसमे छत्तीसगढ़ ने अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य में लघु वनोपजों के संग्रहण और छत्तीसगढ़ हर्बल के उत्पाद की बिक्री का आंकड़ा दिनों-दिन बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार और विकास) सहकारी संघ (CGMFPFeD) की एक इकाई हैंl राज्य में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधन, जंगलो में और उसके आसपास रहने वाले व्यक्तियों, विशेषकर आदिवासियों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार और विकास) सहकारी संघ यह प्रयास कर रहा है कि मूल्यवान संसाधनों को छत्तीसगढ़ के स्थायी मॉडल में सुरक्षित और एकत्र किया जाए। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में 52 लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही है, जबकि तीन वर्ष पहले यहां सिर्फ 7 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर होती थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के सकारात्मक दृष्टिकोंण की वजह से छत्तीसगढ़ हर्बल्स के प्रोडक्ट आन लाइन माध्यम से पूरे भारत में बिक रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार और विकास) सहकारी संघ( CGMFPFeD) वनवासियों से 52 लघु वनोपज खरीदता है और 150 से अधिक मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन कर रहा है। संघ ने उत्पादों की खुदरा बिक्री के लिए राज्य के सभी प्रमुख जिलों में 30 संजीवनी केंद्र स्थापित किए हैं। वर्ष 2021-2022 के दौरान, छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए संघ ने विभिन्न नई रणनीतियों को अपनाया और नई बिक्री तकनीकों को लागू किया।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों की बिक्री के लिए सर्वप्रथम वितरण नेटवर्क प्रबंधन तैयार किया गया और इसके लिए एक निजी फर्म को काम दिया गया जिससे वितरण के लिए नए क्षेत्र खुले। मार्च 2021 में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के अधिकृत वितरक के रूप में अवनि आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त किया गया । संजीवनी आउटलेट के प्रभावी प्रबंधन और उत्पादों की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला से उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है तथा संरचित विज्ञापन और प्रचार-प्रसार से संजीवनी केन्द्रो और हर्बल उत्पादों की दृश्यता बढ़ी है l प्रचार के लिए विभिन्न विपणन सामग्रियों का उपयोग किया गया तथा समय-समय पर समाचार पत्र, होर्डिंग्स, सूचना पत्रक आदि का उपयोग किया गया l

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों को डीलर, सब-डीलर और रिटेलर्स के माध्यम से ओपन रिटेल मार्केट नेटवर्क में प्रवेश मिला है और इससे उत्पादों को बाजार और ग्राहकों तक पहुंचना आसान हो गया। इसके लिए छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख जिलों में डीलरों की नियुक्ति की गई। इसके लिए वितरक द्वारा 9 माह में 15 डीलर नियुक्त किए गए। इसके अलावा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय स्तर की प्रदर्शनियों में छत्तीसगढ़ हर्बल्स की उपस्थिति ने विश्व स्तर पर उत्पादों की पहुंच का विस्तार किया है। छत्तीसगढ़ हर्बल्स ने दुबई में अंतर्राष्ट्रीय गल्फ फूड फेस्टिवल, दिल्ली में इंटरनेशनल इंडसफूड इवेंट, दिल्ली में ट्राइबल फेस्टिवल, भोपाल में इंटरनेशनल हर्बल फेयर, छत्तीसगढ़ दिवाली हाट मेला, राज्योत्सव और मॉल में प्रदर्शनियों में भाग लिया जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ हर्बल्स को एक ब्रांड के रूप में स्थायित्व मिला है।

अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के प्रवेश ने इसके उत्पादों की उपलब्धता देश भर में सुनिश्चित की है। छत्तीसगढ़ हर्बल्स को देश के लगभग हर राज्य से ऑर्डर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों को ग्रामीण ई-स्टोर के सीएससी नेटवर्क (CSC Grameen e store) के साथ जोड़ने से इसकी उपस्थिति ग्रामीण बाजार में भी सुनिश्चित हुयी है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के अपने जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स श्री धन्वन्तरी में भी छत्तीसगढ़ हर्बल्स की उपलभ्धता सुनिश्चित की जा रही है और उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग से यह ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाया गया है। ग्राहकों की संख्या में वृद्धि करने के लिए प्रदेश भर में संजीवनी आउटलेट्स का नवीनीकरण किया गया और इससे ग्राहक आकर्षित भी हुए हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स को व्यापक बनाने के लिए इसके अंतर्गत अनाज, मसाले, कुकीज, पर्सनल केयर आइटम आदि जैसी नई उत्पादों की श्रृंखला जोड़ी गयी है जिससे ग्राहकों को खरीदारी करने के लिए व्यापक रेंज की उपलब्धता सुनिश्चित हुयी है। इतना ही नहीं उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए गिफ्ट हैंपर्स की प्रीमियम श्रंखला बनायी गयी है और इसकी उपलभ्धता सुनिश्चित कराई गयी है जिससे हर्बल उत्पादों का व्यवस्थित तरीके से प्रचार प्रसार हुआ है तथा ग्राहकों ने इन गिफ्ट हैंपर्स को हाथो हाथ अपनाया है।

छत्तीसगढ़ के वन प्राकृतिक संसाधनों से भरे हुए हैं, लेकिन यहां तक पहुंच न होने की वजह से इनका उपयोग भी सीमित था। छत्तीसगढ़ में श्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में इन प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को परखा गया और समर्थन मूल्य पर लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 52 कर दी गयी। छत्तीसगढ़ सरकार के वनवासियों के हित में काम करने के लिए भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भारत सरकार नई दिल्ली (ट्रायफेड) की ओर से छत्तीसगढ़ को लघु वनोपजों हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत साल 2020-21 में अधिकतम वनोपजों को योजना में शामिल करने, भारत शासन की राशि से अधिकतम मूल्य की लघु वनोपजों के क्रय, भारत शासन एवं राज्य शासन की राशि से अधिकतम मूल्य की लघु वनोपजों के क्रय, उपलब्ध कराई गई राशि की वर्ष 2020-21 तक अधिकतम उपयोगिता, वन धन योजना के अंतर्गत अधिकतम सर्वेक्षण पूर्ण करने, वन विकास केन्द्र कलस्टरों हेतु अधिकतम प्रशिक्षण देने, मूल्य संवर्धन से अधिकतम उत्पादों के निर्माण, मूल्य संवर्धन कर उत्पादों के अधिकतम विक्रय के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया था।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वनक्षेत्र है। इन वनक्षेत्रों में तथा इसके आसपास रहने वाले वनवासियों के जीवन एवं आजीविका का मुख्य स्त्रोत वनोपज संग्रहण है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा 7 वनोपजों के स्थान पर 52 वनोपजों के समर्थन मूल्य पर खरीदी की सुदृढ व्यवस्था की है। इस योजना से प्रदेश के 6 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक लाभान्वित हो रहे हैं और छत्तीसगढ़ पिछले दो वर्षों से देश में वनोपज खरीदी में प्रथम स्थान पर है।

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विधानसभा अध्यक्ष से फोन पर बात कर शोक संवेदना  प्रकट की रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संतरा महंत के...

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राज्य एवं शहर5 days ago

छत्तीसगढ़ में प्राइवेट संस्थान, शासकीय और केंद्र शासित कार्यालयों के लिए Work From Home का आदेश जारी ; देखिए दिशा निर्देश

दुखद4 days ago

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CORONA VIRUS6 days ago

छत्तीसगढ़ में आज 5000 से ज्यादा नए मरीज़ मिले, 483 रिकवरी, 4 मौतें ; सार्वाधिक रायपुर से 1454 और दुर्ग से 950 मामले

CORONA VIRUS4 days ago

CG : दुर्ग में साइंस कॉलेज के 14 प्रोफेसर समेत 20 संक्रमित ; बूस्टर डोज के बाद भी MLA भसीन को हुआ COVID ; 11 जवान भी पॉजिटिव

CORONA VIRUS5 days ago

CG में आज 5500 के करीब नए कोरोना मामले मिले, 1933 हुए ठीक, 4 मौत ; सबसे ज्यादा रायपुर से 1785 और दुर्ग से 800 केस

देश-विदेश30 mins ago

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CG : कोरोना के साय तले नन्हीं जिंदगी का आगमन ; डॉक्टर्स की टीम ने कोरोना संक्रमित महिला का किया सफलता पूर्वक प्रसव ; दोनों स्वस्थ

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CG : दुर्ग की निवेदिता शर्मा का भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर पद पर हुआ चयन ; कर्नल से मिलकर एयरफोर्स में जाने का बनाया था मन

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74वां सेना दिवस : PM-राष्ट्रपति ने शुभकामनाएं दीं, आर्मी चीफ नरवणे बोले- 300-400 आतंकी घुसपैठ की ताक में

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