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खुश खबरी : केंद्रीय कर्मचारियों को मिल गया दिवाली का उपहार, महंगाई भत्ता 3% बढ़ा

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आज बड़ा फैसला लिया गया है. उनके लिए दिवाली के तोहफे के रूप में  महंगाई भत्ते को बढ़ाने का फैसला लिया गया है. कैबिनेट मीटिंग में गुरुवार को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते को 3 फीसदी बढ़ाने को मंजूरी दी गई है.

DA में 3 फीसदी की और बढ़त होने का मतलब यह है कि अब महंगाई भत्ता (DA) 31 फीसदी होगा. इस बढ़त का सीधा फायदा 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा.

गौरतलब है कि इस साल जुलाई में ही सरकार ने महंगाई भत्ता (DA Hike) में 11 फीसदी की बढ़त कर इसे 28 फीसदी किया था. इससे पहले DA का भुगतान 17 फीसदी की दर से हो रहा था.

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क्यों हुई बढ़त 

असल में लेबर मिनिस्ट्री ने AICPI (All India Consumer Price Index) के पिछले तीन महीनों के आंकड़े जारी किए थे. इनमें जून, जुलाई और अगस्त का नंबर शामिल था. AICPI इंडेक्स अगस्त में 123 अंक पर पहुंच चुका है. इससे ही यह संकेत मिल गया कि महंगाई भत्ते में सरकार आगे और बढ़त कर सकती है. इसके आधार पर ही केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तय होता है.

बढ़त का असर दूसरे अलाउंस में भी

महंगाई भत्ता बढ़ने से दूसरे अलाउंस में भी इजाफा होगा. इसमें ट्रैवल अलाउंस (Travel Allowance) और सिटी अलाउंस (City Allowance) शामिल हैं. वहीं, रिटायरमेंट के लिए प्रोविडेंट फंड (Provident Fund) और ग्रेच्युटी (Gratuity) में भी बढ़ोतरी होगी.

एक साल में कम से कम इतने का मिलेगा फायदा

न्यूनतम सैलरी 18000 रुपये पर फायदे का गण‍ित इस तरह से होगा-

1. कर्मचारी की बेसिक सैलरी                     18,000 रुपये
2. नया महंगाई भत्ता (31%)                       5580 रुपये/महीने
3. अब तक महंगाई भत्ता (28%)                  5040 रुपये/महीने
4. कितना महंगाई भत्ता बढ़ा                       5580-5040 = 540 रुपये/महीने
5. सालाना सैलरी में इजाफा                       540X12= 6480 रुपये

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देश-विदेश

माेदी सरकार ‘Work From Home’ के लिए कानून लाएगी, काम के घंटे तय करना और बिजली और इंटरनेट के लिए भुगतान पर रहेगा जोर

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National Desk : केंद्र सरकार वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) को लेकर एक व्यापक कानून बनाने की तैयारी कर रही है। नया कानून घर से काम कर रहे कर्मचारियों के प्रति कंपनियों की जिम्मेदारी को तय करेगा। इस घनाक्रम से जुड़े दो सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बाद से कंपनियों ने अपने कर्माचरियों को कोविड-19 संक्रमण से बचाने के लिए अधिकतर कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल अपनाया। बीते साल यानी 2020 में इसे एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा गया, लेकिन अब यह काम करने का नया मॉडल बन गया है। ऐसे में सरकार इस नए कामकाजी मॉडल को लेकर एक कानूनी ढांचा बनाना चाहती है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है उनमें कर्मचारियों के लिए काम के घंटे तय करना और घर से काम करने के दौरान अतिरिक्त खर्च होने वाले बिजली और इंटरनेट के लिए कर्मचारियों को भुगतान करना शामिल है।

परामर्श कंपनी को भी शामिल किया गया

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अधिकारी ने बताया, घर से काम के लिए एक पॉलिसी बनाने में मदद के लिए एक कंसल्टेंसी फर्म को भी शामिल किया गया है। इससे पहले सरकार ने जनवरी में एक स्टैंडिंग ऑर्डर के जरिए सर्विस सेक्टर में ‘वर्क फ्रॉम होम’ को औपचारिक रूप दिया था, जिसके तहत कंपनी और कर्मचारी आपसे में मिलकर काम के घंटे और दूसरी चीजें तय कर सकते हैं। हालांकि, सरकार के इस कदम को सिर्फ एक सांकेतिक अभ्यास के तौर पर देखा गया था, क्योंकि आईटी सहित सर्विस सेक्टर की तमाम कंपनियां पहले से ही अपने कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों के तहत ‘वर्क फ्रॉम होम’ देती रही हैं।

व्यापक औपचारिक ढांचा बनाने की योजना

कोरोना के बाद बदले दौर में अब सरकार सभी सेक्टर्स में ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर व्यापक औपचारिक ढांचा तय करना चाहती है। इसका उद्देश्य बदले हालत में कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। दरअसल मार्च 2020 में कोरोना वायरस के देश में दस्तक देने के बाद से वर्क फ्रॉम होम का चलन चल पड़ा है। कई कंपनियों में अभी भी वर्क फ्रॉम होम के तहत कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। अब तो कोरोना वायरस का नए वैरिएंट ओमीक्रॉम भी आ गया है तो माना जा रहा है फिर से कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कह सकती है।

कई देशों में है पहले से कानून

बता दें कि भारत के अलावा इस समय दुनिया के तमाम देशों में भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर नियम-कानून बनाए जा रहे हैं। हाल ही में पुर्तगाल की संसद ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर एक कानून पास किया है, जिसके तहत कोई कंपनी अपने कर्मचारी को उसकी शिफ्ट खत्म होने के बाद कॉल या मैसेज नहीं कर सकती है। ऐसा करने पर कंपनी पर जुर्माने का प्रावधान है। कोरोना के बाद बहुत सारे कर्मचारियों की शिकायतें रही हैं कि उनसे ज्याद घंटे काम लिया जा रहा है। कई बार उन्हें अपने बॉस के बेवजह गुस्से का शिकार होना पड़ा है। इसको देखते हुए यह कानून लाने की तैयारी है।

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व्यापार

भारत ने पेप्सी को का आलू का पेटेंट रद्द किया

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National Desk : भारत में पेप्सी को बड़ा झटका लगा है. आलू की एक विशेष किस्म पर उसके पेटेंट को रद्द कर दिया गया है. इसी आलू से कंपनी लेज चिप्स बनाती है जो उसके सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पादों में शामिल है. भारत में पेप्सीको इंक के खूब बिकने वाले आलू के चिप्स लेज का पेटेंट रद्द कर दिया है. पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के लिए स्थापित संस्था (PPVFR) ने लेज के आलू चिप्स का पेटेंट रद्द करने का आदेश जारी किया. 2019 में पेप्सी ने गुजरात के कुछ किसानों पर इसलिए मुकदमा कर दिया था क्योंकि वे एफसी5 आलू उगा रहे थे. ये विशेष किस्म के आलू कम नमी के लिए जाने जाते हैं और चिप्स बनाने के लिए उत्तम माने जाते हैं.

पेप्सी का कहना था कि आलू की इस किस्म पर उसका अधिकार है और अन्य किसान बिना उसकी इजाजत के इसे नहीं उगा सकते. किसानों पर मुकदमा पेप्सी की किसानों पर इस कार्रवाई का तीखा विरोध हुआ था जिसके बाद अमेरिकी कंपनी ने अपना मुकदमा वापस ले लिया था. किसानों ने इस मुकदमे को लड़ने की तैयारी कर ली थी. चार किसानों की तरफ से एक वकील ने पेप्सी के खिलाफ मुकदमा शुरू कर दिया था. लेकिन पूरे भारत के किसानों द्वारा विरोध के बाद कंपनी ने कहा था कि सद्भावपूर्ण तरीके से मामला हल कर लिया गया.  किसानों के अधिकारों के लिए काम करने वालीं कविता कुरुगांती ने पीपीवीएफआई अथॉरिटी में एक याचिका दर्ज कर अनुरोध किया कि एफसी5 आलू पर कंपनी का एकाधिकार रद्द किया जाए.

उनका तर्क था कि भारत के नियम बीजों की किस्मों पर पेटेंट का अधिकार नहीं देते. पीपीवीएफआर ने कुरुगांती की इस दलील को स्वीकार किया है कि पेप्सी बीज की एक किस्म पर दावा नहीं कर सकती. अथॉरिटी के अध्यक्ष केवी प्रभु ने कहा, “तुरंत प्रभाव से पंजीकरण रद्द किया जाता है.” किसान बोले, बड़ी जीत इस बारे में पेप्सी ने कहा कि उसे इस आदेश की जानकारी है. एक प्रवक्ता ने कहा, “हमें जानकारी है कि पीपीवीएफआर अथॉरिटी ने ऐसा आदेश पारित किया है और उसकी समीक्षा कर रहे हैं.” हालांकि कंपनी का कहना है कि एफसी5 किस्म को उसने ईजाद किया था और 2016 में उसे पंजीकृत कराया था. पेप्सी ने 1989 में भारत में आलू के चिप्स का पहला प्लांट लगाया था.

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लेज चिप्स बनाने के लिए कंपनी एफसी5 आलू का इस्तेमाल करती है. ये आलू कंपनी कुछ विशेष किसानों से ही खरीदती है. कंपनी ही किसानों को खेती के लिए बीज उपलब्ध करवाती है और बदले में उनसे एक निश्चित कीमत पर आलू खरीदती है. अथॉरिटी के फैसले पर किसानों ने खुशी जताई है. जिन किसानों पर पेप्सी ने 2019 में मुकदमा किया था, उनमें से एक बिपिन पटेल ने कहा, “यह आदेश भारत के किसानों की बड़ी जीत है, और उनके खेती करने के अधिकार को एक बार फिर पुष्ट करती है.” वीके/एए (रॉयटर्स).

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Tech Gyan

प्रीपेड यूजर्स के बाद अब पोस्टपेड ग्राहकों को झटका देने की तैयारी, 20 से 25 फीसदी तक महंगा हो सकता है प्लान

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National Desk : दूरसंचार कंपिनयां प्रीपेड के बाद अब जल्द ही प्रोस्पेड ग्राहकों को झटका दे सकती है। सूत्रों के अनुसार, भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया अपने पोस्टपेड प्लान महंगी कर सकती है। इससे पहले एयरटेल ने पोस्टपेड ग्राहकों के टैरिफ में जुलाई में बढ़ोतरी की थी। साथ हीफैमिली प्लान में भी बदलाव किया गया था। वहीं, दिग्गज टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो की बात करें तो एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के बाद इसके भी प्रीपेड प्लान इस महीने 1 दिसंबर से महंगे हो चुके हैं।

महंगा होने का कम असर

जानकारों का कहना है कि दूरसंचार कंपनियां पोस्टपेड टैरिफ में जितनी देरी होगी, कंपनियों का नुकसान उतना ही अधिक होगा। अगर एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के ग्राहकों के लिए प्लान महंगा करती हैं तो उनको कहीं और जाने की संभावना बहुत कम है क्योंकि उनके लिए ब्रांड प्रिफरेंस और बेहतर अनुभव ज्यादा मायने रखता है।

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भारत में सबसे सस्ता प्लान

हाल के दिनों में प्रीपेड प्लान में बढ़ोतरी के बाद दुनिया भर में भारत में टैरिफ सबसे सस्ता है। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पहले ही मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए 300 रुपये का एआरपीयू (एवरेज रियलाइजेशन पर यूजर) तक पहुंचने का संकेत दे चुकी हैं। वहीं, अभी एआरपीयू 130 रुपये के करीब है जोकि पांच साल पहले 200 रुपये से अधिक था।

ऐसे में कंपनियों ने पहले 200 रुपये के एआरपीयू पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है। वोडाफोन आइडिया का एआरपीयू अभी 109 रुपये और भारती एयरटेल का 153 रुपये है. रिलायंस जियो के लिए एआरपीयू 143.6 रुपये है।

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