Tuesday, March 5, 2024

500 वर्षों बाद रामलला के मंदिर प्रवेश से झूम उठे भक्त, खुशी में 800 किमी दूर चंदखुरी पहुंचे, दो सोने के मुकुट किए दान

चंदखुरी। छत्तीसगढ़ के चंदखुरी को रामलला की माता कौशल्या का मायका माना जाता है और यहां के लोग श्रीराम को अपना भांजा कहते हैं। श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा से उत्साहित भक्तों में से किसी ने दो दिन पहले यहां के कौशल्या मंदिर में दो सोने के भव्य मुकुट गुप्तदान किए। इन मुकुटों को प्राण प्रतिष्ठा के दिन मां कौशल्या और श्रीराम की प्रतिमाओं को पहनाया गया।

इनके दिव्य रूप को देखने के लिए सुबह छह बजे से देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। चमकते चेहरों पर दिख रही खुशी शब्दों के रूप में कुछ इस तरह से सामने आई की रामलला के ननिहाल में सचमुच मेले जैसा नजारा देखने मिला।

मंदिर परिसर में हर पल जितनी तादाद में लोग रामलला को गोद में लेकर बैठी माता कौशल्या के दर्शन करके वापस जा रहे थे, उससे दोगुनी संख्या में लोग आते भी रहे। शाम में 21 हजार दीपों के जलते ही चंदखुरी का पूरा मंदिर मंदिर परिसर जगमग हो उठा। उस समय तो भीड़ और भी बढ़ गई।

माता कौशल्या मंदिर धाम के उपाध्यक्ष वर्मा कहते हैं, मैंने पहली बार यहां इतनी भीड़ देखी है। रात तक संख्या एक लाख से ऊपर हो गई होगी। लोगों के लिए मंदिर को सुबह 6 बजे से खोल दिया गया है लेकिन अपराह्न तीन बजे भी श्रद्धालुओं का तांता कम नहीं। उन्होंने कहा, जहां तक नजर जा रही है, वहां भक्तो की भीड़ दिखाई दे रही है। लोग आते ही जा रहे हैं।

वर्मा कहते हैं, कुछ साल पहले जब मंदिर के नए स्वरूप में बने भवन का उद्घाटन हुआ था तब ऐसी भीड़ देखने को मिली थी। लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के दिन के नजारे के तुलना करें तो उस वक्त बहुत कम लोग थे। दुर्ग के धनेंद्र साहू मंदिर परिसर के बाहर ठेले पर पूजा के नारियल और फल बेच रहे हैं। वे कहते हैं, मैं तो रामलला के प्राण प्रतिष्ठा से एक रात पहले हीचंदखुरी आ गया था। लोग सुबह चार बजे से ही पहुंचने लगे। जबरदस्त बिक्री हो रही है।

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