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Ratan Tata के निवेश वाली कंपनी दे रही कारोबार का मौका, एक बार एक लाख लगाकर हर महीने करें लाखों में कमाई

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इस कंपनी के साथ कारोबार शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें रतन टाटा ने भी पैसे लगाए हुए हैं. (File Photo)
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इस कंपनी के साथ कारोबार शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें उद्योगपति रतन टाटा का निवेश है. इसे शुरू करने के लिए आपको सिर्फ एक बार 1 लाख रुपये लगाना होगा और इससे आप हर महीने मोटी कमाई कर सकेंगे.


Business Desk : कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) ने देश की अर्थव्यवस्था (Economy) के साथ ही आम जन का बजट (Budget) भी बिगाड़ दिया है. महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से हाथ (Job Loss) धोना पड़ा है. लोगों ने गुजर-बसर के लिए दूसरे कामों में हाथ अजमाया है. ऐसे में अगर आप भी अपना कारोबार शुरू करना (Start own Business) चाहते हैं, या अतिरिक्त इनकम चाहते हैं, तो आपके पास शानदार मौका है. जहां, आप कम निवेश में अपना बिजनेस स्टार्ट (small level business ideas) कर सकते हैं.

इसमें सबसे खास बात है कि इस कंपनी में दिग्गज बिजनेसमैन रतन टाटा (Ratan Tata) का भारी निवेश है. जी हां.. हम बात कर रहे हैं- रतन टाटा के निवेश वाली जेनरिक दवा स्टार्टअप कंपनी जेनेरिक आधार (Generic Aadhaar ) की. यह कंपनी आम लोगों को फ्रेचांइजी के जरिए कमाने (earn money from franchise) का मौका दे रही है. जहां आप वन टाइम इंवेस्टमेंट से मेडिकल स्टोर खोल (How to open medical store) सकते हैं और इससे हर महीने अच्छी खासी रकम कमा (Earning opportunity) सकते हैं. तो आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ…

सिर्फ 1 लाख रुपये लगाकर करें शुरू

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अगर आप कम निवेश में प्रॉफिटेबल बिजनेस करना चाहते हैं तो आपके लिए एक बेहतर विकल्प है. जेनरिक आधार की फ्रेंचाइजी टीम के एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि जेनरिक आधार का फ्रेंचाइजी (franchise) कोई भी व्यक्ति ले सकता है. इस कारोबार को शुरू करने के लिए सिर्फ एक बार 1 लाख रुपये का निवेश करना होगा. इस फ्रेंचाइजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी अपने पार्टनर्स को 40% तक मार्जिन देती है, जबकि बड़ी दवा कंपनियां 15-20% का अधिकतम मार्जिन देती हैं. कंपनी 1000 तरह की जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराएगी. इन दवाओं पर ग्राहकों को 80 प्रतिशत तक की छूट मिलती है. इसमें सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि कंपनी जो भी ऑनलाइन दवा का आर्डर लेगी. यदि वह आपके शहर का होगा तो यह आर्डर आपको मिलेगा.

कई ऐसे रिटेलर्स हैं जो कि कंपनी की फ्रेंचाइजी लेकर हर महीने 8-10 लाख तक की कमाई कर लेते हैं. हालांकि, कमाई सिटी और लोकेशन वाइज निभर्र करता है.

रतन टाटा के साथ जेनेरिक आधार के संस्थापक अर्जुन देशपांडे

फ्रेंचाइजी लेने के लिए क्या करें?

जेनेरिक आधार का फ्रेंचाइजी उन्हें मिलता है, जो पहले से ही अपना मेडिकल स्टोर चला रहे हैं या फिर जो अपना नया स्टोर शुरू करना चाहते हैं.अगर आप इस कंपनी की फ्रेंचाइजी लेते हैं तो कंपनी की तरफ से ही आपको GA (Generic Aadhaar) का ब्रांड लोगो (Logo) मिलेगा. साथ ही ब्रांडिंग मैटेरिल, इन-हाउस प्रोडक्ट्स और मेडिसिन पर्सेज के लिए इन-हाउस साॅफ्टवेयर दी जाएगी. इसके लिए आपको ड्रग लाइसेंस भी लेनी पड़ेगी.

जानें इस कंपनी के बारे में सबकुछ

भारत के सबसे युवा संस्थापक अर्जुन देशपांडे (Founder Mr. Arjun Deshpande) का जेनेरिक आधार एक फार्मेसी व्यवसाय है, जिसे ऑनलाइन और ऑफलाइन (Online & Offline Business) दोनों तरह से किया जा सकता है. जेनरिक आधार कंपनी की शुरूआत भले ही महाराष्ट्र के पुणे से हुई थी लेकिन अब यह 18 राज्यों में 130 से अधिक शहरों में अपनी पहुंच बना चुका है. इस फार्मा कंपनी में रतन टाटा ने खुद निवेश किया है.

जानें कैसे करें आवेदन?

कंपनी के मुताबिक, अगर आप इस कंपनी के साथ जुड़कर कमाई करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले कंपनी की वेबसाइट https://genericaadhaar.com/ पर जाना होगा. यहां आपको Business Opportunity का Option दिखाई देगा. यहां क्लिक करने पर फ्रेंचाइजी के लिए ऑनलाइन फॉर्म खुल जाता है. इसके अलावा, व्यवसाय के बारे में अधिक जानने के लिए और फाॅर्म भरने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं- https://genericaadhaar.com/franchise-opportunities.php. यहां आपको अपना विवरण भेजना होगा जैसे- नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और शहर का नाम.अलावा फ्रेंचाइजी से जुड़ी जानकारी के लिए नीचे दिए गए नंबरों पर कॉल कर सकते हैं. इसके लिए आप देश भर की फ्रेंचाइजी के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं.पश्चिम भारत – 9653373636, उत्तर भारत – 9653373640, पूर्वी भारत – 9653373641, दक्षिण भारत – 9653373639).

(Disclaimer- यह जानकारी कंपनी से मिली सूचना के आधार पर है. फ्रेंचाइजी लेने से पहले आप खुद पूरी तरह जांच पड़ताल कर लें.)

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व्यापार

PM किसान योजना में बड़ा बदलाव, e-KYC पूरी किए बिना नहीं आएगी 10वीं किस्त, इसे पूरा करने का यह है तरीका

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National Desk : पीएम किसान निधि योजना की 10वीं किस्‍त 15 दिसंबर तक जारी होने वाली है। अगर आप भी इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं तो फौरन e-KYC पूरा कर लें। इसके बिना आपकी किस्त लटक सकती है। सरकार ने इस योजना में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

सरकार ने PM KISAN योजना में रजिस्टर्ड किसानों के लिए e-KYC आधार अनिवार्य कर दिया है। पोर्टल पर कहा गया है कि आधार आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण के लिए किसान कॉर्नर में ईकेवाईसी विकल्प पर क्लिक करें और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए निकटतम सीएससी केंद्रों से संपर्क। वैसे आप घर बैठे ही अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की मदद से इसे पूरा कर सकते हैं।

इसके लिए सबसे पहले आप https://pmkisan.gov.in/ पोर्टल पर जाएं।

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दाएं हाथ पर आपको इस तरह के टैब्स मिलेंगे। सबसे ऊपर eKYC लिखा मिलेगा। इस पर क्लिक करें

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अब आप अपना आधार नंबर और इमेज कोड डालकर सर्च बटन पर क्लिक करें

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  • इसके बाद आधार से लिंक मोबाइल नंबर डालें और ओटीपी डालें
  • अगर सबकुछ ठीक रहा तो eKYC पूरी हो जाएगी वरना Invalid लिख कर आएगा।
  • अगर ऐसा हुआ तो आपकी किस्त लटक सकती है। आप आधार सेवा केंद्र पर इसे ठीक करा सकते हैं।
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देश-विदेश

माेदी सरकार ‘Work From Home’ के लिए कानून लाएगी, काम के घंटे तय करना और बिजली और इंटरनेट के लिए भुगतान पर रहेगा जोर

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National Desk : केंद्र सरकार वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) को लेकर एक व्यापक कानून बनाने की तैयारी कर रही है। नया कानून घर से काम कर रहे कर्मचारियों के प्रति कंपनियों की जिम्मेदारी को तय करेगा। इस घनाक्रम से जुड़े दो सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बाद से कंपनियों ने अपने कर्माचरियों को कोविड-19 संक्रमण से बचाने के लिए अधिकतर कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल अपनाया। बीते साल यानी 2020 में इसे एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा गया, लेकिन अब यह काम करने का नया मॉडल बन गया है। ऐसे में सरकार इस नए कामकाजी मॉडल को लेकर एक कानूनी ढांचा बनाना चाहती है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है उनमें कर्मचारियों के लिए काम के घंटे तय करना और घर से काम करने के दौरान अतिरिक्त खर्च होने वाले बिजली और इंटरनेट के लिए कर्मचारियों को भुगतान करना शामिल है।

परामर्श कंपनी को भी शामिल किया गया

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अधिकारी ने बताया, घर से काम के लिए एक पॉलिसी बनाने में मदद के लिए एक कंसल्टेंसी फर्म को भी शामिल किया गया है। इससे पहले सरकार ने जनवरी में एक स्टैंडिंग ऑर्डर के जरिए सर्विस सेक्टर में ‘वर्क फ्रॉम होम’ को औपचारिक रूप दिया था, जिसके तहत कंपनी और कर्मचारी आपसे में मिलकर काम के घंटे और दूसरी चीजें तय कर सकते हैं। हालांकि, सरकार के इस कदम को सिर्फ एक सांकेतिक अभ्यास के तौर पर देखा गया था, क्योंकि आईटी सहित सर्विस सेक्टर की तमाम कंपनियां पहले से ही अपने कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों के तहत ‘वर्क फ्रॉम होम’ देती रही हैं।

व्यापक औपचारिक ढांचा बनाने की योजना

कोरोना के बाद बदले दौर में अब सरकार सभी सेक्टर्स में ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर व्यापक औपचारिक ढांचा तय करना चाहती है। इसका उद्देश्य बदले हालत में कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। दरअसल मार्च 2020 में कोरोना वायरस के देश में दस्तक देने के बाद से वर्क फ्रॉम होम का चलन चल पड़ा है। कई कंपनियों में अभी भी वर्क फ्रॉम होम के तहत कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। अब तो कोरोना वायरस का नए वैरिएंट ओमीक्रॉम भी आ गया है तो माना जा रहा है फिर से कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कह सकती है।

कई देशों में है पहले से कानून

बता दें कि भारत के अलावा इस समय दुनिया के तमाम देशों में भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर नियम-कानून बनाए जा रहे हैं। हाल ही में पुर्तगाल की संसद ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर एक कानून पास किया है, जिसके तहत कोई कंपनी अपने कर्मचारी को उसकी शिफ्ट खत्म होने के बाद कॉल या मैसेज नहीं कर सकती है। ऐसा करने पर कंपनी पर जुर्माने का प्रावधान है। कोरोना के बाद बहुत सारे कर्मचारियों की शिकायतें रही हैं कि उनसे ज्याद घंटे काम लिया जा रहा है। कई बार उन्हें अपने बॉस के बेवजह गुस्से का शिकार होना पड़ा है। इसको देखते हुए यह कानून लाने की तैयारी है।

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भारत ने पेप्सी को का आलू का पेटेंट रद्द किया

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National Desk : भारत में पेप्सी को बड़ा झटका लगा है. आलू की एक विशेष किस्म पर उसके पेटेंट को रद्द कर दिया गया है. इसी आलू से कंपनी लेज चिप्स बनाती है जो उसके सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पादों में शामिल है. भारत में पेप्सीको इंक के खूब बिकने वाले आलू के चिप्स लेज का पेटेंट रद्द कर दिया है. पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के लिए स्थापित संस्था (PPVFR) ने लेज के आलू चिप्स का पेटेंट रद्द करने का आदेश जारी किया. 2019 में पेप्सी ने गुजरात के कुछ किसानों पर इसलिए मुकदमा कर दिया था क्योंकि वे एफसी5 आलू उगा रहे थे. ये विशेष किस्म के आलू कम नमी के लिए जाने जाते हैं और चिप्स बनाने के लिए उत्तम माने जाते हैं.

पेप्सी का कहना था कि आलू की इस किस्म पर उसका अधिकार है और अन्य किसान बिना उसकी इजाजत के इसे नहीं उगा सकते. किसानों पर मुकदमा पेप्सी की किसानों पर इस कार्रवाई का तीखा विरोध हुआ था जिसके बाद अमेरिकी कंपनी ने अपना मुकदमा वापस ले लिया था. किसानों ने इस मुकदमे को लड़ने की तैयारी कर ली थी. चार किसानों की तरफ से एक वकील ने पेप्सी के खिलाफ मुकदमा शुरू कर दिया था. लेकिन पूरे भारत के किसानों द्वारा विरोध के बाद कंपनी ने कहा था कि सद्भावपूर्ण तरीके से मामला हल कर लिया गया.  किसानों के अधिकारों के लिए काम करने वालीं कविता कुरुगांती ने पीपीवीएफआई अथॉरिटी में एक याचिका दर्ज कर अनुरोध किया कि एफसी5 आलू पर कंपनी का एकाधिकार रद्द किया जाए.

उनका तर्क था कि भारत के नियम बीजों की किस्मों पर पेटेंट का अधिकार नहीं देते. पीपीवीएफआर ने कुरुगांती की इस दलील को स्वीकार किया है कि पेप्सी बीज की एक किस्म पर दावा नहीं कर सकती. अथॉरिटी के अध्यक्ष केवी प्रभु ने कहा, “तुरंत प्रभाव से पंजीकरण रद्द किया जाता है.” किसान बोले, बड़ी जीत इस बारे में पेप्सी ने कहा कि उसे इस आदेश की जानकारी है. एक प्रवक्ता ने कहा, “हमें जानकारी है कि पीपीवीएफआर अथॉरिटी ने ऐसा आदेश पारित किया है और उसकी समीक्षा कर रहे हैं.” हालांकि कंपनी का कहना है कि एफसी5 किस्म को उसने ईजाद किया था और 2016 में उसे पंजीकृत कराया था. पेप्सी ने 1989 में भारत में आलू के चिप्स का पहला प्लांट लगाया था.

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लेज चिप्स बनाने के लिए कंपनी एफसी5 आलू का इस्तेमाल करती है. ये आलू कंपनी कुछ विशेष किसानों से ही खरीदती है. कंपनी ही किसानों को खेती के लिए बीज उपलब्ध करवाती है और बदले में उनसे एक निश्चित कीमत पर आलू खरीदती है. अथॉरिटी के फैसले पर किसानों ने खुशी जताई है. जिन किसानों पर पेप्सी ने 2019 में मुकदमा किया था, उनमें से एक बिपिन पटेल ने कहा, “यह आदेश भारत के किसानों की बड़ी जीत है, और उनके खेती करने के अधिकार को एक बार फिर पुष्ट करती है.” वीके/एए (रॉयटर्स).

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