Tuesday, March 5, 2024

गर्दन में सूजन और दर्द से राहत पाने के ल‍िए अपनाएं ये 5 आयुर्वेद‍िक उपाय

Swelling in Neck Ayurvedic Remedies: गर्दन में दर्द और सूजन एक कॉमन समस्‍या बनती जा रही है। जो लोग एक ही जगह पर बैठकर लगातार काम करते हैं, उन्‍हें अक्‍सर इस समस्‍या का सामना करना पड़ता है।

गर्दन को ब‍िना ह‍िलाए, ज्‍यादा देर बैठने से गर्दन में जकड़न महसूस होती है, ह‍िलाने पर दर्द और सूजन आ जाती है। हालांक‍ि केवल यही कारण नहीं है। बैक्‍टीर‍ियल या वायरल संक्रमण की चपेट में आने से भी गर्दन में सूजन या उर्द की समस्‍या हो सकती है। दांत में संक्रमण, सर्दी-जुकाम, बुखार, साइनस का इंफेक्‍शन आद‍ि होने पर भी गर्दन में सूजन हो सकती है। गर्दन में सूजन की समस्‍या को दूर करने के ल‍िए डॉक्‍टर एंटीबायोट‍िक्‍स या पेनक‍िलर का सेवन करने की सलाह देते हैं। दवाओं के साथ कुछ सुरक्ष‍ित आयुर्वेद‍िक उपचार को घर पर भी आजमां सकते हैं। आयुर्वेद‍िक जड़ी-बूट‍ियों की मदद से सूजन को कम क‍िया जा सकता है। ये उपचार, डॉक्‍टर खुद आप तक लेकर आए हैं। चल‍िए जानते हैं गर्दन में दर्द और सूजन दूर करने के आयुर्वेद‍िक तरीके। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थित प्रांजल आयुर्वेद‍िक क्‍लीन‍िक के डॉ मनीष स‍िंह से बात की।

1. अरंडी तेल की माल‍िश

गर्दन का दर्द और सूजन दूर करने के ल‍िए अरंडी तेल का इस्‍तेमाल (Castor Oil Use) कर सकते हैं। अरंडी तेल रक्‍त प्रवाह को बढ़ाता है। अरंडी तेल में र‍िस‍िनोल‍ीइक एस‍िड होता है ज‍िससे गर्दन का दर्द जल्‍दी ठीक हो सकता है। अरंडी तेल या कैस्‍टर ऑयल नहीं है, तो सरसों के तेल की माल‍िश भी सूजन से छुटकारा द‍िला सकती है। ज‍िन लोगों को अक्‍सर गर्दन में दर्द रहता है, उन्‍हें सरसों के तेल को हल्‍का गरम करके उससे गर्दन की माल‍िश करनी चाह‍िए।

2. अश्वगंधा से दूर होगी गर्दन की सूजन

अश्वगंधा में कूल‍िंग प्रॉपर्टीज होती हैं। गर्दन में दर्द और सूजन को कम करने के ल‍िए अश्वगंधा का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। अश्वगंधा में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं। दर्द को दूर करने के ल‍िए अश्वगंधा का सेवन फायदेमंद होता है। बाजार में म‍िलने वाले अश्वगंधा तेल से गर्दन की माल‍िश कर सकते हैं या घर पर अश्वगंधा तेल बना सकते हैं-

तेल बनाने के ल‍िए नार‍ियल को धीमी आंच पर गरम करें।
उसमें अश्वगंधा पाउडर डालें। तेल को पकने दें।
जब तेल के साथ अश्वगंधा का अर्क म‍िल जाए, तो गैस बंद करके तेल को ठंडा होने दें।
जब तेल ठंडा हो जाए, तो उसे शीशी में भरकर रख लें।
3. नीलग‍िरी तेल से गर्दन की माल‍िश करें

गर्दन में सूजन और दर्द दूर करने के ल‍िए नीलग‍िरी तेल का इस्‍तेमाल करें। नीलग‍िरी तेल में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इस तेल की मदद से मांसपेश‍ियों में जकड़न और दर्द से छुटकारा म‍िलता है। नीलग‍िरी की पत्तियों को सुखाकर पाउडर बना लें, इस पाउडर को तेल के साथ म‍िला सकते हैं। नीलग‍िरी तेल बाजार में भी म‍िलता है। 1 चम्‍मच नीलग‍िरी तेल को कर‍ियर ऑयल जैसे नार‍ियल या बादाम के तेल की 2 चम्‍मच के साथ म‍िलाएं। इस म‍िश्रण से गर्दन की माल‍िश करें। नीलग‍िरी तेल से जोड़ों में होने वाले दर्द, स‍िर दर्द आद‍ि से भी राहत म‍िलती है।

4. त्र‍िफला चूर्ण खाएं

गर्दन में सूजन दूर करना चाहते हैं, तो त्र‍िफला चूर्ण का सेवन करें। त्र‍िफला का मतलब होता है तीन फल। त्र‍िफला आंवला, बहेड़ा और हरितकी से म‍िलकर बनता है। गठ‍िया रोग में भी इसका इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। त्र‍िफला चूर्ण का सेवन गुनगुने पानी के साथ कर सकते हैं। इसे खाली पेट भी खाया जा सकता है। त्र‍िफला चूर्ण बनाने का तरीका आसान है। तीनों फलों को सुखाकर पाउडर बना लें और बराबर मात्रा में म‍िलाकर रख लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर एयरटाइट कंटेनर में रखें। त्र‍िफला की तासीर गरम होती है इसल‍िए गर्भवती मह‍िलाओं को इसका सेवन करने की सलाह नहीं दी जाती।

5. ब्राह्मी और गोटू कोला का इस्‍तेमाल करें

गर्दन में सूजन होने पर ब्राह्मी और गोटू कोला जैसी आयुर्वेद‍िक औषध‍ियों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इनमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। गोटू कोला की मदद से ऑक्सीडेटिव तनाव कम करने में मदद म‍िलती है। दर्द और सूजन को दूर करने के ल‍िए इन जड़ी-बूट‍ियों का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। गर्दन की सूजन के साथ-साथ इन जड़ी-बूट‍ियों से अर्थराइट‍िस में होने वाले जोड़ों के दर्द से भी छुटकारा म‍िलता है। ब्राह्मी और गोटू कोला को पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर का सेवन भी कर सकते हैं और इसे सरसों के तेल के साथ म‍िलाकर माल‍िश करने से भी लाभ म‍िलता है।

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