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Chhattisgarh : उइके ने राजिम माघी पुन्नी मेला में की संत समागम की शुरुआत, कहा- राजिम मेला का समाजिक और धार्मिक महत्व है

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रायपुर : त्रिवेणी संगम राजिम के पुण्य तट पर 15 दिनों तक लगने वाले राजिम माघी पुन्नी मेला में जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम का शुभारंभ राज्यपाल सु अनुसुइया उइके के मुख्य आतिथ्य में हुआ। राज्यपाल ने भगवान राजीवलोचन और महानदी की पूजा आरती कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की । इस अवसर पर धर्मस्व मंत्री ताम्रध्वज साहू , अभनपुर विधायक धनेंद्र साहू , राजिम विधायक अमितेश शुक्ल ,संत विचार साहेब, सिद्धेश्वरानंद जी महाराज, उमेश आनंद जी महाराज, देवदास जी महाराज ,गोवर्धन शरण जी महाराज मंच पर विशेष रूप से मौजूद थे।

मंच पर राज्यपाल सु उइके ने कहा कि मुझे छत्तीसगढ़ की पवित्र नगरी राजिम में आयोजित माघी पुन्नी मेला में आकर अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का त्रिवेणी संगम है, जिसके कारण इसे छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहा जाता है। राजिम छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक स्थल है। उन्होंने कहा कि किसी भी मेला का सामाजिक और सामुदायिक महत्व है, विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है। साथ ही इसके माध्यम से नई पीढ़ी को परंपराओं का ज्ञान भी होता है।

संतों का जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि राजिम पुन्नी मेले का सांस्कृतिक महत्व भी है। इस बार कोरोना काल के कारण कुछ आयोजन सीमित हुए है। इस मेले में लोकनाट्य और लोकनृत्य आयोजन होते रहे हैं। ऐसे आयोजन जनमानस को उनकी प्राचीन परंपराओ से जोड़े रखते हैं और नई पीढ़ी को उसका ज्ञान भी कराते है।

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उइके ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला जैसे आयोजन पर्यटकों को अद्भुत अनुभव देने और आकर्षित करने में सक्षम हैं। पर्यटन की दृष्टि से ये देश के एक अच्छे केन्द्र के रूप में उभर सकता है। हमें ऐसे प्रयासों को बढ़ाने की जरूरत है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र में और प्रभावी स्थान पा सके तथा यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ायी जा सके। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की बढ़ गयी है कि हम कला, साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करें तथा ऐसे प्रयास करें जिससे हमारी कला, संस्कृति और साहित्य से आने वाली पीढ़ी जुडे़। राज्यपाल ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने नदियों, सरोवरों और वृक्षों की महत्ता और उनके संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज इस बात की आवश्यकता है कि हम अपने पुरखों द्वारा दिखाई गई राह पर चलें और नदियों को तथा अपने आस-पास के वातावरण को साफ तथा प्रदूषण मुक्त बनाए रखें, पौधे लगाएं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें । राज्यपाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोनावायरस बचने के लिए अभी भी सावधानी बरतें और मास्क का उपयोग करें ।

धर्मस्व और जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि हम मेला को लगातार अच्छा बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थानीय पुरोहितों ने पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती की है। उन्होंने महाशिवरात्रि में सबको पुण्य स्नान के लिए आमंत्रित किया । इस अवसर पर अभनपुर विधायक धनेंद्र साहू ने राजिम की गरिमा को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां की संस्कृति, परम्परा और आस्था लोगो के जीवन शैली में शामिल है। पुरातन समय मे लोग अपने परिवार के साथ यहां आते थे और राजिम मेला का आनद लेते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार मूल संस्कृति और परम्परा को आगे बढ़ा रही है ।

राजिम विधायक शुक्ल ने कहा कि राजिम की इस पवित्र भूमि से सदैव लगाव रहा है ।यहां की मिट्टी से वे रचे बसे है। उन्होंने कहा कि राजिम मेले की महत्ता इस क्षेत्र ही नही बल्कि पूरे देश के लिए जाना जाता है। कलेक्टर क्षीरसागर ने अपने प्रतिवेदन में बताया कि अब तक करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने राजिम मेला में आकर कर दर्शन किये है।कोरोना संक्रमण से सावधानी बरतने प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किये गए है। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं कलेक्टर निलेश क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक भोज राम पटेल , मौजूद थे ।

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राज्यपाल ने राजभवन छत्तीसगढ़ पर केन्द्रित डॉक्यूमेंट्री का किया विमोचन

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रायपुर : राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज राजभवन छत्तीसगढ़ पर केन्द्रित डॉक्यूमेंट्री का विमोचन किया। राजभवन के काफ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने वृत्त चित्र की सराहना करते हुए कहा कि इस डॉक्यूमेंट्री में राजभवन के सभी हिस्सों का रोचक प्रस्तुतीकरण किया गया है। इस वृत्त चित्र के माध्यम से आमजनों को राजभवन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी।

इस डॉक्यूमेंट्री में राजभवन के निर्माण से अब तक के राजभवन की यात्रा का वर्णन किया गया है। इसमें सभी राज्यपाल, राजभवन के विभिन्न भागों की अधोसंरचना-राजभवन, सचिवालय, दरबार हॉल आदि की विस्तृत जानकारी दी गई है। साथ ही राजभवन के दोनों उद्यान, उसमें लगे पेड़-पौधों की प्रजातियों के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया है। इसके साथ ही राजभवन के दरबार हॉल की विशेषता एवं यहां आयोजित विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट कार्यक्रमों की जानकारी दी गई है। इस वृत्त चित्र का निर्माण जनसंपर्क विभाग द्वारा किया गया है।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री अमृत कुमार खलखो, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री आर.के. अग्रवाल, उप सचिव श्री दीपक कुमार अग्रवाल, राज्यपाल के परिसहाय श्री सूरज सिंह परिहार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

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हर्बल स्टेट बनने की ओर कदम बढ़ाता छत्तीसगढ़ : तीन साल में ही साढ़े चार सौ गुना बढ़ा विक्रय ; अगले वर्ष तक एक हजार गुना विक्रय बढ़ाने हो रहा प्रयास

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रायपुर : कभी पिछड़े प्रदेश के रूप में पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ अब लगातार नई उपलब्धियों को हासिल कर रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य की इन्हीं उपलब्धियों में यहां उत्पादित होने वाले हर्बल्स (औषधि) अब अहम भूमिका निभा रही है। एक ओर जहां सरकारी प्रयासों से स्थानीय बाजार समेत देश-दुनिया के दूसरे कोनों तक पहुंच रहे छत्तीसगढ़ के हर्बल्स रिकॉर्ड कायम करने की ओर है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ अब हर्बल स्टेट बनने की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। यह न सिर्फ राज्य की एक अलग पहचान बनाने के लिए उल्लेखनीय है, बल्कि इससे वनवासियों की आर्थिक समृद्धि की भी हो रही है। बता दें कि राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के माध्यम से 150 से अधिक मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन किया जा रहा है।

हाल ही में सामने आए आँकड़ों पर गौर करें तो बीते तीन साल में ही छत्तीसगढ़ के हर्बल्स का विक्रय साढ़े चार सौ गुना बढ़ा है, जबकि राज्य शासन का लक्ष्य अगले वित्तीय वर्ष तक विक्रय को एक हजार गुना तक पहुंचाने का है। गौरतलब है कि राज्य में वित्तीय वर्ष 2019-20 में जहां सवा करोड़ (1.25 करोड़) रुपए मूल्य के हर्बल उत्पादों का व्यापार छत्तीसगढ़ ने किया था। वहीं वर्ष 2020-21 में दो करोड़ 15 लाख रुपए का और चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के सिर्फ 9 महीने में ही 4 करोड़ 34 लाख रुपए मूल्य के हर्बल उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बिक्री हो चुकी है।

संजीवनी केंद्रों व श्री धनवन्तरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स में भी उपलब्धता

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बता दें कि छत्तीसगढ़ में उपलब्ध औषधीय पौधों के संग्रहण और प्रसंस्करण का काम विशेष तौर से वनवासी करते हैं। वहीं वन क्षेत्रों में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा भी हर्बल उत्पादों को तैयार किया जा रहा है। राज्य शासन ने इन हर्बल उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड नेम दिया और इन उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियों को अपनाया। इस कड़ी में प्रदेश के सभी जिलों में 30 संजीवनी केंद्र प्रारंभ किए गए, जहां से छत्तीसगढ़ में उत्पादित और निर्मित हर्बल उत्पादों की बिक्री की जा रही है। इसके अलावा श्री धनवन्तरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स में भी छत्तीसगढ़ हर्बल्स की बिक्री सुनिश्चित की गई है।

फेस्टिवल्स का अहम हिस्सा बने छत्तीसगढ़ के हर्बल्स

छत्तीसगढ़ हर्बल्स न सिर्फ संजीवनी केन्द्रों तक सीमित है, बल्कि देश के दूसरे राज्यों से लेकर अंतर्राज्यीय स्तर पर आयोजित होने वाले अनेक फेस्टिवल्स में भी छत्तीसगढ़ हर्बल्स की मौजूदगी देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ हर्बल्स ने दुबई में अंतर्राष्ट्रीय गल्फ फूड फेस्टिवल, दिल्ली में इंटरनेशनल इंडस फूड इवेंट, दिल्ली में ट्राइबल फेस्टिवल, भोपाल में इंटरनेशनल हर्बल फेयर, छत्तीसगढ़ दिवाली हाट मेला, राज्योत्सव और मॉल में प्रदर्शनियों में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के स्टॉल लगे। इसके अलावा भी कई सरकारी और निजी संगठनों द्वारा आयोजित विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी छत्तीसगढ़ हर्बल्स के स्टॉल शामिल होते हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर भी हो रहा उपलब्ध 

छत्तीसगढ़ हर्बल्स की बिक्री में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म का भी योगदान अहम रहा है। ऑनलाइन सेल्स व शॉपिंग प्लेटफार्म के माध्यम से देश के अन्य राज्यों के साथ विदेशों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स में अनाज, मसाले, कुकीज, पर्सनल केयर आइटम आदि जैसी नई उत्पाद श्रृंखला के जुड़ने से ग्राहकों को खरीदारी करने के लिए व्यापक रेंज मिली।

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लघु वनोपजों की खरीदी में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल

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  • तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री में 1090% का इजाफा
  • लघु वनोपजों से संवर रहा है छत्तीसगढ़ के वनवासियों का जीवन
  • मुख्यमंत्री के प्रयासों से हो रही है अधिकतम लघु वनोपजों की खरीदी
  • छत्तीसगढ़ हर्बल के माध्यम से छत्तीसगढ़ की बन रही है विश्वव्यापी पहचान

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य ने एक नया कीर्तिमान कायम करते हुए बीते तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री में 1090 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है। वर्ष 2017-18 में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री 1 करोड़ 26 लाख रूपए थी जो वर्ष 2018-19 में 8.7 फीसदी बढ़कर 1 करोड़ 37 लाख रूपए तक पहुंची थी। वर्ष 2019-20 में छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पादों की बिक्री 1 करोड़ 25 लाख रूपए की रही। वर्ष 2020-21 में विगत आंकड़ों से 70 फीसदी की वृद्धि के साथ छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पाद की बिक्री 2 करोड़ 15 लाख रूपए रही। वर्ष 2021-22 में छत्तीसगढ़ हर्बल के उत्पादों की बिक्री के लिए 7 करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा गया तथा वित्तीय वर्ष के शुरूआती 9 माह में ही लक्ष्य के विरूद्ध 4 करोड़ 34 लाख रूपए के उत्पादों की बिक्री की जा चुकी है। यह 2017-18 के विरूद्ध 455 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह से छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2022-23 के लिए छत्तीसगढ़ हर्बल उत्पादों की बिक्री के लिए 15 करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा है और यह लक्ष्य साल 2017-18 की तुलना में 1090 फीसदी अधिक है ।

छत्तीसगढ़ राज्य सन 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना था, तब छत्तीसगढ़ को कोई जानता भी नहीं था परन्तु धीरे धीरे छत्तीसगढ़ अब हर क्षेत्र में आगे आते जा रहा है। उन्ही में से एक क्षेत्र है लघु वनोपज संग्रहण का क्षेत्र जिसमे छत्तीसगढ़ ने अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य में लघु वनोपजों के संग्रहण और छत्तीसगढ़ हर्बल के उत्पाद की बिक्री का आंकड़ा दिनों-दिन बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार और विकास) सहकारी संघ (CGMFPFeD) की एक इकाई हैंl राज्य में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधन, जंगलो में और उसके आसपास रहने वाले व्यक्तियों, विशेषकर आदिवासियों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार और विकास) सहकारी संघ यह प्रयास कर रहा है कि मूल्यवान संसाधनों को छत्तीसगढ़ के स्थायी मॉडल में सुरक्षित और एकत्र किया जाए। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में 52 लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही है, जबकि तीन वर्ष पहले यहां सिर्फ 7 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर होती थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के सकारात्मक दृष्टिकोंण की वजह से छत्तीसगढ़ हर्बल्स के प्रोडक्ट आन लाइन माध्यम से पूरे भारत में बिक रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार और विकास) सहकारी संघ( CGMFPFeD) वनवासियों से 52 लघु वनोपज खरीदता है और 150 से अधिक मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन कर रहा है। संघ ने उत्पादों की खुदरा बिक्री के लिए राज्य के सभी प्रमुख जिलों में 30 संजीवनी केंद्र स्थापित किए हैं। वर्ष 2021-2022 के दौरान, छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए संघ ने विभिन्न नई रणनीतियों को अपनाया और नई बिक्री तकनीकों को लागू किया।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों की बिक्री के लिए सर्वप्रथम वितरण नेटवर्क प्रबंधन तैयार किया गया और इसके लिए एक निजी फर्म को काम दिया गया जिससे वितरण के लिए नए क्षेत्र खुले। मार्च 2021 में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के अधिकृत वितरक के रूप में अवनि आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त किया गया । संजीवनी आउटलेट के प्रभावी प्रबंधन और उत्पादों की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला से उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है तथा संरचित विज्ञापन और प्रचार-प्रसार से संजीवनी केन्द्रो और हर्बल उत्पादों की दृश्यता बढ़ी है l प्रचार के लिए विभिन्न विपणन सामग्रियों का उपयोग किया गया तथा समय-समय पर समाचार पत्र, होर्डिंग्स, सूचना पत्रक आदि का उपयोग किया गया l

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों को डीलर, सब-डीलर और रिटेलर्स के माध्यम से ओपन रिटेल मार्केट नेटवर्क में प्रवेश मिला है और इससे उत्पादों को बाजार और ग्राहकों तक पहुंचना आसान हो गया। इसके लिए छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख जिलों में डीलरों की नियुक्ति की गई। इसके लिए वितरक द्वारा 9 माह में 15 डीलर नियुक्त किए गए। इसके अलावा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय स्तर की प्रदर्शनियों में छत्तीसगढ़ हर्बल्स की उपस्थिति ने विश्व स्तर पर उत्पादों की पहुंच का विस्तार किया है। छत्तीसगढ़ हर्बल्स ने दुबई में अंतर्राष्ट्रीय गल्फ फूड फेस्टिवल, दिल्ली में इंटरनेशनल इंडसफूड इवेंट, दिल्ली में ट्राइबल फेस्टिवल, भोपाल में इंटरनेशनल हर्बल फेयर, छत्तीसगढ़ दिवाली हाट मेला, राज्योत्सव और मॉल में प्रदर्शनियों में भाग लिया जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ हर्बल्स को एक ब्रांड के रूप में स्थायित्व मिला है।

अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के प्रवेश ने इसके उत्पादों की उपलब्धता देश भर में सुनिश्चित की है। छत्तीसगढ़ हर्बल्स को देश के लगभग हर राज्य से ऑर्डर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पादों को ग्रामीण ई-स्टोर के सीएससी नेटवर्क (CSC Grameen e store) के साथ जोड़ने से इसकी उपस्थिति ग्रामीण बाजार में भी सुनिश्चित हुयी है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के अपने जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स श्री धन्वन्तरी में भी छत्तीसगढ़ हर्बल्स की उपलभ्धता सुनिश्चित की जा रही है और उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग से यह ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाया गया है। ग्राहकों की संख्या में वृद्धि करने के लिए प्रदेश भर में संजीवनी आउटलेट्स का नवीनीकरण किया गया और इससे ग्राहक आकर्षित भी हुए हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स को व्यापक बनाने के लिए इसके अंतर्गत अनाज, मसाले, कुकीज, पर्सनल केयर आइटम आदि जैसी नई उत्पादों की श्रृंखला जोड़ी गयी है जिससे ग्राहकों को खरीदारी करने के लिए व्यापक रेंज की उपलब्धता सुनिश्चित हुयी है। इतना ही नहीं उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए गिफ्ट हैंपर्स की प्रीमियम श्रंखला बनायी गयी है और इसकी उपलभ्धता सुनिश्चित कराई गयी है जिससे हर्बल उत्पादों का व्यवस्थित तरीके से प्रचार प्रसार हुआ है तथा ग्राहकों ने इन गिफ्ट हैंपर्स को हाथो हाथ अपनाया है।

छत्तीसगढ़ के वन प्राकृतिक संसाधनों से भरे हुए हैं, लेकिन यहां तक पहुंच न होने की वजह से इनका उपयोग भी सीमित था। छत्तीसगढ़ में श्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में इन प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को परखा गया और समर्थन मूल्य पर लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 52 कर दी गयी। छत्तीसगढ़ सरकार के वनवासियों के हित में काम करने के लिए भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भारत सरकार नई दिल्ली (ट्रायफेड) की ओर से छत्तीसगढ़ को लघु वनोपजों हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत साल 2020-21 में अधिकतम वनोपजों को योजना में शामिल करने, भारत शासन की राशि से अधिकतम मूल्य की लघु वनोपजों के क्रय, भारत शासन एवं राज्य शासन की राशि से अधिकतम मूल्य की लघु वनोपजों के क्रय, उपलब्ध कराई गई राशि की वर्ष 2020-21 तक अधिकतम उपयोगिता, वन धन योजना के अंतर्गत अधिकतम सर्वेक्षण पूर्ण करने, वन विकास केन्द्र कलस्टरों हेतु अधिकतम प्रशिक्षण देने, मूल्य संवर्धन से अधिकतम उत्पादों के निर्माण, मूल्य संवर्धन कर उत्पादों के अधिकतम विक्रय के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया था।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वनक्षेत्र है। इन वनक्षेत्रों में तथा इसके आसपास रहने वाले वनवासियों के जीवन एवं आजीविका का मुख्य स्त्रोत वनोपज संग्रहण है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा 7 वनोपजों के स्थान पर 52 वनोपजों के समर्थन मूल्य पर खरीदी की सुदृढ व्यवस्था की है। इस योजना से प्रदेश के 6 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक लाभान्वित हो रहे हैं और छत्तीसगढ़ पिछले दो वर्षों से देश में वनोपज खरीदी में प्रथम स्थान पर है।

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