Saturday, September 30, 2023

India Vs Bharat : भारत और इंडिया को लेकर देश में हो रही चर्चा…जानिए कैसे रहा है भारत से इंडिया तक का सफर

नई दिल्ली.  ‘भारत’ और ‘इंडिया’ नाम इस समय देश की राजनीति का मुख्य केंद्र बने हुए हैं. दोनों नामो को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है. ये बहस उस आमंत्रण पत्र से शुरू हुई जो राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से  G20 में शामिल होने आए राष्‍ट्रप्रमुखों को रात्रिभोज के लिए भेजा गया था. निमत्रंण पत्र में‘प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया’ के बजाय ‘प्रेसीडेंट ऑफ भारत’ लिखा गया था. सवाल ये उठ रहा है कि क्या केंद्र की मोदी सरकार देश का नाम सिर्फ भारत ही करने वाली है. आज हम देश के नामों की चर्चा करेंगें.

सबसे पहले भारतीय संविधान की बात करते हैं. इंडियन कंस्टीट्यूशन के आर्टिकल 1 में ‘इडिया दैट इज भारत’ लिखा गया है. यानी इंडिया जो भारत भी है. अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या देशका नाम अब सिर्फ भारत ही रह जाएगा? संविधान से इंडिया शब्द हटा दिया जाएगा. दरअसल, सरकार की ओर से 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. इसे लेकर  भारत और इंडिया मसले पर राजनीतिक गलियारे में बहस छिड़ चुकी है. आइए जानते हैं देश के नामों के सफरनामा की कहानी.

प्राचीन काल में देश के नाम
अगर हम अपने देश के सबसे पुराने नाम की बात करें तो इसे आर्यवर्त कहा जाता था. आर्यवर्त को ही भारत का सबसे पुराना नाम माना जाता है. इसके अलावा प्राचीन काल में देश को अनेकों नाम से जाना जाता था. भारतवर्ष, जम्बूद्वीप, भारतखंड, हिंदुस्तान, हिंद, अल-हिंद, ग्यागर, फग्युल, तियानझू, होडू, जैसे नामों से हमारे देश को जाना जाता था.

सबसे प्रचलित भारत
अगर हमारे देश को किसी नाम से प्रसिद्धी मिली है तो वो भारत नाम से मिली है. हमारे कई धर्म ग्रंथो में भी भारत शब्द का उल्लेख मिलात है. देश का नाम भारत पड़ने के पीछे की कई कथाए भी प्रचलित हैं. वर्तमान देश के दो नाम भारत और इंडिया है. अब सवला ये भी उठता है कि आखिर हमारे देश का सबसे प्रचलित और प्रसिद्ध नाम ‘भारत’ कैसे पड़ा.

विष्णुपुराण में भरत
विष्णुपुराण में कहा गया है कि ऋषभदेव की एक कहानी बताई गई है. इस कहानी में कहा गया है कि ऋषभदेव ने बांट बांधकर वन प्रस्थान किया तो उन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र भरत को देश का उत्तारिधाकीर बना दिया. कहा जाता है भरत के नाम से देश का नाम भारत पड़ा.

महाभारत के भरत से भारत
महाभारत की एक कथा के मुताबिक महर्षि विश्‍वामित्र और अप्सरा मेनका की बेटी शकुन्तला का विवाह राजा दुष्यन्त का गांधर्व विवाह हुआ था. इन दोनों को जिस संतान की प्राप्ति हुई उसका नाम भरत था. कहा जाता था है कि ऋषि कण्व ने आशीर्वाद दिया था कि भरत आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट बनेंगे. इसी के नाम से देश का नाम भारत पड़ेगा. दुष्यंत और शकुंतला की प्रेम कथा को लेकर महाकवि कालीदास ने अभिज्ञानशाकुन्तलम् नामक महाकाव्य की रचना भी की थी. दोनों के पुत्र भरत के नाम से देश का नाम भारत पड़ा इसका जिक्र तो कहानियों में वर्णित हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि जब भरत इतने महान थे तो उनकी वीरता की और कहानियां क्यों नहीं मिलती. ऐसे में ये शोध का विषय है कि देश का नाम भारत कैसे पड़ा.

रामायण के भरत से भारत
देश का नाम भारत पड़ने को लेकर महाकाव्य रामायण में भगवान श्रीराम के छोटे भाई भरत से जोड़ा जाता है. जब भगवान श्रीराम वनवास चले गए थे उनके छोटे भाई ने श्रीराम की खड़ाउ रखकर कुटिया में रहकर राजकाज संभाला. भरत ने अपने आपको कभी राजा नहीं माना. न तो कभी महल में रहे न ही किसी सुख सुविधाओं का लाभ उठाया. कहा जाता है उनके इस त्याग और प्रेम को देखते हुए देश का नाम भारत पड़ा. भारत नाम को लेकर एक कहानी भरत ऋषि की भी है. वो मगधराज इन्द्रद्युम्न के दरबार में थे. उन्हीं के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा.

जैन परंपरा में भारत का जिक्र
जैन परंपरा के अनुसार ऋषभदेव के बड़े बेटे भरत के नाम पर देश का नाम भारत वर्ष पड़ा. भारतवर्ष नाम का उल्लेख  विष्णुपुराण, वायुपुराण, लिंगपुराण, ब्रह्माण्डपुराण, अग्निपुराण और मार्कण्डेय पुराण मिलता है. कहा जाता है कि इन्हीं कहानियों के आधार पर देश का नाम भारत पड़ा.

जम्बूद्वीप
हमारे देश को जम्बूद्वीप भी कहा जाता था. इस नाम के पीछे भी कई कहानियां प्रचलति है. कहा जाता है कि जंबू पेड़ की वजह से हमारे देश का नाम जम्बूद्वीप पड़ा. विष्णु पुराण में एक कथा है कि जम्बू वृक्ष के फल बहुत बड़े-बड़े होते थे. जब वो सड़कर पहाड़ की चोटियों पर गिरते थे तो उनके रस से एक धारा बन जाती थी. वो धारा एक नदी का रूप ले लेती थी. उस नदी या जगह को परिभाषित करने के लिए उसे जम्बूद्वीप के नाम से पुकारा जाता था.

आर्यवर्त
हमारे देश को आर्यवर्त भी जाता था. इस नाम को देश का पहला नाम माना जाता है. कहा जाता है कि आर्यवर्त आर्यों का निवास स्थान हुआ करता था. उन्हीं के नाम से भू-भाग को जाना जाता था. आर्यों की संस्कृति का पूरे क्षेत्र में बोलबाला था. मनु स्मृति में हिमालय और विंध्य पर्वतमाला के बीच बंगाल की खाड़ी से अरब सागर तक के पूरे क्षेत्र को आर्यवर्त नाम से जाना जाता था.

हिंदुस्तान
आज भी हम अपने देश को हिंदुस्तान के नाम से पुकारते हैं. भले ही संविधान में इंडिया और भारत का जिक्र हुआ है लेकिन ज्यादातर  भारतीय आज भी देश को हिंदुस्तान के नाम से ही पुकारते है. इस नाम के पीछे भी कई कहानी है. हिंदू और हिंद शब्द आर्य क्षेत्र या सिंधु नदी के क्षेत्र से आए हैं. आचमेनिड के सम्राट डेरियस फर्स्‍ट ने करीब 516 ईसा पूर्व सिंधु घाटी पर विजय प्राप्त की थी. निचले सिंधु घाटी क्षेत्र के लिए डेरियस फर्स्‍ट ने हिंदूश या हाय-डु-यू-एस नाम का इस्तेमाल किया था. इसके बाद पहली शताब्दी में हिंदू शब्द में प्रत्यय जोड़कर इसे हिंदुस्तान कर दिया गया था. तभी से देश का नाम हिंदुस्तान पड़ा. नक्श-ए-रुस्तम शिलालेख में भी हिंदुस्तान नाम लिखा हुआ था.

इंडिया
भारत में अंग्रेजों के साथ यूनानी भी आए. उन्होंने ने हिंदुस्तान को इंडस और इंडिका कहकर संबोधित किया. 16वीं  शताब्दी तक भारत में अंग्रेज अपना असतित्व जमा चुके थे. इस सदी में हिंदुस्तान और भारत नाम सबसे ज्यादा प्रचलति थे लेकिन अंग्रेजों ने सरकारी दस्तावेजों में हिंदुस्‍तान या भारत की जगह INDIA नाम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. तभी से देश को इंडिया के नाम से जाना जाने लगा.

तो ये थी भारत से इंडिया बनने की कहानी. हमने आपको इस लेख में बताया कि कैसे देश का नाम भारत पड़ा. भारत नाम बहुत चर्चित रहा है. अभी भी है. भारत के बाद हिंदुस्तान और फिर इंडिया तक का सफर कैसे रहा ये कहानी ऊपर लिखे लेख में हमने बताई हैं.

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